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Saturday, August 20, 2011

करें भारत को फिर से आज़ाद


क्या सोच के दी उन वीरो ने क़ुरबानी !
भारत देश के भविष्य के लिए लूटा दी अपनी जवानी |
लहरे तिरंगा आज़ाद वतन में ...
था सिर्फ एक सपना उन वीरो के मन में |

करते अफ़सोस अगर होते भगत सिंह,
रोते ये हाल देख चन्द्र शेखर और बिस्मिल...
इतिहास के पन्ने पलट कर ये देखो...
सोचो क्यों दी थी उन वीरो ने क़ुरबानी...

क्या सही मायने में है हम आज़ाद...
या है कैदी भ्रष्ट राजनीति के आज...

सच्चाई यहाँ दबती , झूठ लेता है सांस...
दफ़न होती है अच्छाई, हँसता सिर्फ पाप...
होते करोड़ो के घोटाले, फिर भी भूखे सड़कों पर लोग है...
गुन्हा , भ्रष्टाचार से बढ़ रहा है भारत...

क्या ऐसी आज़ादी की थी बापू की कल्पना ...
क्या  सच में  है  ये  आज़ाद  भारत....

आज वक्त आया है फिर से दोबारा.
हर युवक लगा रहा संग नारा...
भूल जाओ अब सब है और कोई काम..
दो साथ अन्ना का , जिसने थामा है हाथ..

भगादो आज मिल भ्रष्टाचार सारा...
करदो इस देश को फिर से आज़ाद ||


                                                                        गार्गी (२०१)

Sunday, July 31, 2011

उम्र बीती आधी है.....


अभी   उम्र  बीती  आधी   है ...
अभी  उम्र  आधी  बाकी  है ... 


 कुछ  ख़ास  लम्हों  की  यादे  है ...
कुछ  यादे बननी  बाकी  है ... 
साथ छूटा  है कुछ   अपनों का ... 
और  कुछ  अपने  बनने बाकी   है ...

अभी   उम्र  बीती  आधी   है ...
अभी  उम्र  आधी  बाकी  है ...   

जो  उम्र  गुजारी  है  हमने  ... 
उससे  सीखा   काफी है ... 
आने  वाले  पलों  से....
 बहुत  सीखना  बाकी  है ...  
 काम  किये  कुछ  ख़ास  है ...
 कुछ  ख़ास काम  बाकी   है  ... 

अभी   उम्र  बीती  आधी   है ...
अभी  उम्र  आधी  बाकी  है ...

                                                                     गार्गी (२०१)


Monday, July 25, 2011

Save Girl Child


Need to Save the Girl Child in India
 JULY 12, 2011(Raman Media Network)
According to India’s 2011 Census, there are now 7 million more boys than 
girls aged 0 to 6 years and the gap is growing.The ratio of girls to boys has dropped to an all time low since records began. Today, the national figure has fallen to an alarming 914 girls for every 1,000 boys. In some states like Punjab that ratio is as low as 846 girls to 1,000 boys.
Read the article and thought sharing this ....wrote these  lines in  2002 when saw one article about the same situation......

                  
बेटी 

ना मिटा मुझे बाबुल मैं तेरा अंश हूँ,
ना बढ़ पायेगी तेरी पीढ़ी फिर भी तेरा वंश हूँ |
करुँगी तेरा नाम रोशन , सदैव दूंगी सहारा ,
आने दे इस संसार में ना कर ऐसे बेसहारा |
होती है बेटी ...बेटो से बढ़ कर,
सच करा है इसे हर बार उसने वक्त पर  ||

कैसा अंधकार ये छा गया है ,
मिटाने  लगे देवी को लोग है ...
माँ के सवरूप की होती थी जहाँ पूजा ,
घर -घर   सूना आज उस औज से है ...
आओ करे मिल प्रण आज ये हम ....
ना मिटायेंगे बेटी अब कभी हम ...
बेटी से ही रोशन घर बार सारा,
ये है वरदान एक उज्जवल सितारा ||

                                                                                                    गार्गी (२००२)

Thursday, July 14, 2011

Mumbai blast

Its sad ,very sad fourth times its happening .....why is Mumbai is soft target ? I wrote these lines, when it happened on 11-07-2006 in  Mumbai local trains.....

"बम की आत्मकथा "

मुझे एक शैतान ने बनाया ,
मौत को कैद कर मुझमे सुलाया ...
जब जब उसने मुझे जलाया ,
मैंने कईयो को तडपाया ,
उनके अपनों को रुलाया |
मुझमे कैद मौत ने कई मौतों को उपजाया....
मुझे एक शैतान ने बनाया ||
माली लगता है पौधे जो सिर्फ देते जीवन है ....
ये मेरी विडंबना है मुझसे पैदा होती सिर्फ मौत है ||

                                                           गार्गी (२००६)

Sunday, May 8, 2011

Life (जिन्दगी)

It was my first poem, wrote it in year 2000. This poem expresses my thoughts for life.The true meaning of life is still hidden but based on my experiences  I wrote this poem.

 Life teaches a lot to everyone and motivates to live it.... 




 "जिन्दगी"

रात के उस ख्वाब में मैंने खुद को एक झील के किनारे  पाया ,
शायद एक जन्नत में पहुँच गयी थी |
फूलो से भरी  वहां बगिया महक रही थी ,
फिर में एक सुनहरी कश्ती में बैठ उसे खेने लगी ,
और उस झील के गहराई को महसूस करने लगी|
वहां के परिंदे और भवरे सुरीले साज छेड़ रहे थे, 
वो हर पल  खूबसूरत याद बन दिल में समां रहा था ||

पर शायद वो ख्वाब जिंदगानी की हकीकत बता गया ,
कुछ  आगे जाकर वो झील झरना बन गयी,
मेरी कश्ती उन्ही गहराईयो में खो गयी,
मुझे  होश कब आया ,कुछ  याद नही आता ,
पर मैंने खुद को कुछ  चट्टानों में पाया |

पल भर में खूबसूरत लम्हे खौफनाक बन गए ,
मैंने खुद को संभाला और उठ खड़ी हुई |
और जिन्दगी के उस मोड़ पर पहुंची ,
जहाँ मैं इसकी सचाई से वाकिफ हुई ....

 जिन्दगी हर मोड़ पर खूबसूरत हो ये जरूरी नही ,
और इसकी हर रह पथरीली हो ऐसा भी नही |
हर एक ख़ुशी - गम बिना अधूरी है ,
और बिना ख़ुशी -गम के जिन्दगी भी अधूरी है...

ये ख़ुशी -गम दोनों एक दुसरे के सच्चे है साथी ,
जो जिन्दगी की सुनहरी कश्ती को एक साथ मिलकर खेते है,
और हमे अपनी मंजिल तक पहुंचाते है ||



                                                                                                                        गार्गी (२००० )






Wednesday, May 4, 2011

Khuda

While typing the title I choose "Khuda" because some how I liked this word to best pronounce the God. I do not restrict myself in any religion because I am more comfortable to be a human.The more I know myself as a human it delights me, that I am not in a bounded wall of religion.I know there is someone who has made me think about that the God exist. Its my belief because in my life he supported me in my tough times though in a form of humans.
Human those who are part of my family, friends or some strangers but they helped me so I consider them as a form of God.To express my these thoughts long back I wrote this poem , hope who are reading this blog understand the depth of words.....

                                           खुदा

अ ' खुदा तू क्या है , कभी ये समझ न आया ,
किसी ने तुझे नानक तो  किसी ने राम बताया,

कोई कहता है कृष्ण , तो कोई पीर मोहम्मद ,
कभी साकार , तो कभी निराकार |

तू है या नही पर तेरा अहसास है ,
कि मेरे खुदा तू पाक है ||

जो इन्सान करता है मदद दुसरो कि लगता है यही खुदा है,
क्योंकि सुन रखा है , जिसकी मदद कोई नही करता खुदा करता है मदद उसकी ||

अ' मेरे पर्वतदिगार  , तेरी ये खूबियाँ हर दिल में है बसती,
पर जब तेरी रहम जिस किसी पर है बरसती ,

वो बन जाते है स्वरुप तेरा और खुदा है कहलाते ,
सच ही है जिसने जाना खुद को वही खुदा कहलाया  || 
  
                                                                                 गार्गी (२००१)